Saturday, 20 February 2016

दर्द शहीदों का (pain of martyrs)

पूछ रहा है सवाल भगत सिंह, राजगुरु और हर एक शहीद जावान!
क्या इसी आजादी के लिए दिया था हमने बलिदान!!

जिस तिरंगे की आन के लिए ,खुशी खुशी दी थी वीरो ने अपनी जान!
आज आजाद हिन्दुस्तान मे खतरे मे पड गयी है हमारे तिरंगे की शान!!

जिस सीने ने देश की शरहद पे ,प्रतिकूल हालातो मे प्रहार झेले है!
आज इन देशद्रोहियो के हितैषियों की वजह से ,हुए वो अकेले है!!

आज राजनीति कितनी गंदी हो गयी है ,
किस प्रकार देशद्रोह पर भी राजनीति की जाती है और आतंकियों को किस प्रकार प्रोत्साहित किया जा रहा है,
उसका थोड़ा वर्णन.....

बड़े-बड़े जब मेमन की फांसी रुकवाने अड़ते हैं,
दृश्य देख ये आतंकी के और हौसले बढ़ते हैं!

जब अफजल और हाफिज सईद के पीछे साहब जोड़ा जाता है,
ऐसा करके वीरो और सेनाओं का साहस तोड़ा जाता है!

डायन, भारत माँ को कहकर जो मंत्री बन जाता है,
देख के उनको आतंकी का फिर से सीना  तन जाता है!

जब अफरीदी के छक्कों पर ताली बजने लगती है,
आतंकी मंसूबों की उम्मीदे फिर से जगने लगती है!

काश्मीर में जब भारत का झंडा जलने लगता है,
ठीक उसी पल आतंकियों का सपना पलने लगता है!

ऐसे मुद्दों पर भी संसद राजनीति कर जाती है,
आतंकी हँसते हैं ,सेनिको की चीखें मर जाती है!

कठिन वक्त में प्यारे सब को एक साथ बढ़ना होगा,
राष्ट्रवाद की खातिर सब को एक साथ लड़ना होगा!

निहित स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद की बात करो,
आलोक तिरंगे के चेहरे पर खुशियों की बरसात करो!

एक बार फिर ये पंक्तिया दोहराने की जरूरत है....

भरा नही जो भावो से,
बहती जिसमे रसधार नही!
हृदय नही वो पत्थर है ,
जिसमे स्वदेश का प्यार नही!!

सभी देशभको को एक संदेश .....
कृपया एक हो जाओ और देश द्रोहियो को मिल कर देश से निकालो !!
bloggerpct
Posted by prakash chand thapliyal

Friday, 19 February 2016

राष्ट्र के नाम एक संदेश

आज कुछ बातें दिल से निकलेगी,
उम्मीद है दिल तक पहुँचेगी...

आज जिंदगी की इस भाग दौड़ मे हमे न जाने कहाँ जाने की जल्दी है इस भाग दौड़ मे हम इतना आगे निकल आये है कि पीछे मुड़ कर देखना जरा मुश्किल लगता है...

चलो एक नजर डालते है कि हम कितना आगे निकल आये है......

अपनी खुशी तो याद रही पर दुसरो के गम को भूल गए,
निज हित तो याद रहा पर देश धर्म को भूल गए|
राजनीति तो याद रही पर राम नीति की भूल गए,
जीवन जीना सीख गए पर अर्थ उसका भूल गए||

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flirting करना याद रहा पर प्यार निभाना भूल गए,
girlfriend का हाथ साथ रहा और माँ के पैरो को भूल गए|
Divorce लेना सीख गए और रिश्ते निभाना भूल गए,
जीवन जीना सीख गए पर मूल्य उसका भूल गए||

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अंग्रेजी तो हम सीख गए पर हिन्दी लिखना भूल गए,
चाउमीन पिज़्ज़ा खाना याद रहा चूल्हे की रोटी भूल गए|
हाय हैल्लो तो सीख गए पर राम राम करना भूल गए,
मॉडर्न तो हम हो गए पर संस्कार दूर कही पर भूल गए||

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jeans पहनना सीख गए और साड़ी कुर्ता भूल गए,
attitude तो सीख लिया पर संस्कार दूर कही पर भूल गए|
खिलोनो से खेलना भूल गए और जज्बातों से खेलना सीख गए,
जीवन जीना सिख गए पर उद्देश्य उसका भूल गए||

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सत्ता सुख तो याद रहा और राम लला को भूल गए,
जिस वादे से सत्ता मे आये उसी वादे को भूल गए|
आज देश मे जिंदा लाशे कर रही है राज ,
इसीलिए राम मंदिर चंद कानूनी फाइलो का है महोताज||

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अनुष्का शर्मा याद रही और क्रिकेट खेलना भूल गए,
अपना गौरव याद रहा पर शोर्य देश का भूल गए|
रासलीला तो सीख गए पर सार गीता का भूल गए,
जीवन जीना सीख गए पर लक्ष्य उसका भूल गए||

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यू तो ये हवा का झोंका भी नही पर समझते है खुद को आंधी,
इन जनाब का नाम है श्रीमान राहुल गांधी|
अलगाववादियों से मिलना इन्हें जरूरी लगा और देश के लिए गोली खाने वालो को भूल गए,
राजनीति तो ये कभी सीख नही पाए अब राष्ट्रनीति भी भूल गए।।

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आजकल कुछ ज्यादा ही modern हो गए युवा कहते है "we dont like religious topic like hinduism"..

वे कृपया ध्यान से पढ़े....

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हिंदू न ही सिर्फ एक धर्म है जबकि ये तो एक पूरी सभ्यता है,
भारत मैं रहने वाला हर एक नागरिक हिन्दू है|
जब जब देश मैं हिन्दू यू ही सोता है,
देश हमारा अक्सर यू ही रोता है||

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अगर किसी को अपने आप को हिन्दू कहने से है परेशानी ,
तो वो नही है असली हिन्दुस्तानी|
अब और देशद्रोही नही बर्दाश करेगा हिन्दुस्तान ,
उन सबकी मेजबानी करेगा हमारा पड़ोसी पाकिस्तान||

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अगर कभी हो जाये कभी इतनी औकात किसी अमीर की,
तो लगा के दिखाए कीमत हमारे ज़मीर की|
हमारी जरूरते है कम इसलिए हमारे जमीर मे है दम,
बस एक बात का है गम आपका साथ है थोड़ा कम||

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आप सभी से निवेदन है ज्यादा से ज्यादा संख्या मे हमसे जुड़े......

अगर ये सब बातें आपको कही और मिल जाये तो हम ये मुहिम छोड़ देंगे,
क्योंकि हम यहा झूठ बोलने या नकल करने नही आये है|

हम राजनीति नही राम नीति करने आये है|..
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Posted by prakash chand thapliyal